एपिसोड 1:पूर्व की शान और पश्चिम का दंभ
(जयपुर, सरकारी दफ़्तर। दोपहर 3:00 बजे)
अन्वेषा पट्टनायक (25) अपने दफ़्तर की खिड़की के पास खड़ी थी। बाहर राजस्थान की तेज़ धूप और धूल उड़ रही थी। उसने हल्की नीली कॉटन की साड़ी पहनी थी—सिंपल, पर उसकी ईमानदारी उसके कपड़ों में भी दिखती थी। वह अभी-अभी ओडिशा से अपनी नई पोस्टिंग पर आई थी।
मेज पर एक सरकारी फ़ाइल रखी थी: 'विकास संकल्प योजना'। यह राजस्थान सरकार का सबसे बड़ा और सबसे ज़्यादा विवादित प्रोजेक्ट था।
अन्वेषा (मन ही मन सोचती है): "ओडिशा का समुद्र भले ही दूर हो, पर मेरे नियम यहाँ भी नहीं बदलेंगे। विकास ज़रूरी है, पर ईमानदारी से। राठौड़ जी की ताक़त बहुत बड़ी है, पर मेरी ड्यूटी (कर्तव्य) उससे भी बड़ी है।"
घड़ी में ठीक 3:00 बजते हैं। मीटिंग का समय हो गया था। अन्वेषा ने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई। वह शांति से फ़ाइल उठाती है और कॉन्फ़्रेंस रूम की ओर चली जाती है। वह जानती थी कि आज उसकी मुलाक़ात इस पूरे राज्य के सबसे ताक़तवर आदमी से होने वाली है।
(कॉन्फ़्रेंस रूम: एंट्री और तकरार)
रूम में पहले से ही तीन-चार बड़े सरकारी अफ़सर और कुछ राजनैतिक सलाहकार बैठे थे—सबके चेहरों पर टेंशन थी।
अन्वेषा अपनी जगह लेती है, फ़ाइल खोलकर इंतज़ार करती है।
ठीक 3:05 पर, दरवाज़ा खुलता है और अभिमान राठौड़ (30) की एंट्री होती है।
वह 6 फ़ीट का, मूँछों वाला, ज़बरदस्त हैंडसम आदमी। उसने गहरे रंग का नेहरू जैकेट और सफ़ेद कुर्ता पहना था, जो उसकी राजसी शान दिखा रहा था। उसके आते ही, कमरे की हवा बदल जाती है।
सब लोग तुरंत खड़े हो जाते हैं, सिर झुकाकर 'गुड इवनिंग' कहते हैं।
सिर्फ़ अन्वेषा बैठी रहती है।
यह देखकर अभिमान एक पल के लिए रुक जाता है। उसकी नज़र सीधे अन्वेषा पर पड़ती है—एकदम शांत, बिना डरे बैठी हुई। उसकी सत्ता को ऐसी अनदेखी पहली बार मिली थी।
अभिमान (आवाज़ में गुस्सा नहीं था, पर एक अजीब सी गरमी थी): "माफ़ कीजिएगा। मेरा इलाका दूर है, पर सरकारी काम में समय की पाबंदी बहुत ज़रूरी है। अन्वेषा जी, उम्मीद है आप यहाँ सहज महसूस कर रही होंगी।"
अन्वेषा (सीधा देखते हुए, आँखों में आँखें डालकर): "राठौड़ जी, मैं सहज महसूस करने नहीं, ड्यूटी करने आई हूँ। आप बैठिए, हम शुरू करते हैं।"
अभिमान मुस्कुराता है, पर यह मुस्कान शिकारी की थी। उसने अपने चेहरे पर आए अहंकार की चोट को छिपा लिया। उसने कुर्सी खींची और अन्वेषा के ठीक सामने बैठ गया।
मीटिंग शुरू हुई। अभिमान ने अपनी 'विकास संकल्प योजना' को ऐसे पेश किया जैसे वह कोई सरकारी काम नहीं, बल्कि देश का भविष्य हो। उसकी आवाज़ में ऐसा कॉन्फिडेंस था कि कोई उसे मना नहीं कर सकता था।
अभिमान (अन्वेषा को देखते हुए): "यह प्रोजेक्ट मेरे लोगों के लिए मेरे दिल का टुकड़ा है। मैं चाहता हूँ, इस पर सबसे तेज़ काम हो। मुझे आपकी ईमानदारी पर पूरा भरोसा है, अन्वेषा जी।"
परिचय
वो पूर्वी तट की शांत लहर, जो पश्चिम के रेगिस्तान में आई है।
उसके नैनों में 'जगन्नाथ' की आस्था, और हाथों में संविधान' की स्याही है।
हमारी नायिका - अन्वेषा पट्टनायक (25)🌸
(Odisha Govt Officer)
पिताजी -रिटायर्ड प्रोफेसर। अपनी बेटी की ईमानदारी पर गर्व करते हैं, लेकिन उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
उन्हें अभिमान की दुनिया से डर लगता है। वह सादगी के आगे शक्ति को तुच्छ मानते हैं।
माँ -पारंपरिक, भक्तिमय महिला। अपनी बेटी के लिए कला (नृत्य) और सादगी को बहुत महत्व देती हैं।
वह केवल चाहती हैं कि अन्वेषा खुश रहे, लेकिन राजस्थान के राजसी ठाठ-बाट को अपनी बेटी के लिए सही नहीं मानतीं।
हमारे नायक - अभिमान राठौर (30)🔥
वह स्थानीय विधायक (MLA)
वो पश्चिम के मरुस्थल का तेज़ सूरज,
जो राजनीति के सिंहासन पर बैठा है।
छे फुट का कद, राजपूती मूंछों में आधुनिकता का साया,
गोर वर्ण, जिसके हर आदेश में दबंगई का नशा है।
वो अपनी 'इज्जत' का पहरेदार, पर 'विकास' की बात करता है,
पुराने उसूलों की छाया में रहकर भी, दुनिया को मुट्ठी में रखता है।
परिवार ही शक्ति है, और शक्ति ही उसका अभिमान,
मगर वो जानता नहीं, जल्द टूटेगा उसका हर गुमान।
अक्सर हम जिसे अपनी ताक़त समझते हैं, वही हमारा सबसे बड़ा अहंकार बन जाता है। 'सफ़र-ए-दिल' की शुरुआत दो ऐसे ही किनारों से हुई है जो कभी मिल नहीं सकते। एक तरफ अन्वेषा का अटूट 'ईमान' है और दूसरी तरफ अभिमान की बेतहाशा 'ज़िद'। क्या होगा जब राजस्थान की तपती रेत ओडिशा की शांत लहरों को सोखने की कोशिश करेगी? यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं का युद्ध है।
क्रमशः ❤️
Thank you 😊 🌸❤️🔥